खुश रहना चाहते हैं, तो अपने खाने में शामिल करें फल और सब्जियां

लंदन: कहते हैं कि फल और सब्जियां खाने से जितनी ताकत आती है, उतनी किसी और चीज़ को खाने में शामिल करने से नहीं आती। दिन भर अगर आप अपने खाने में पौष्टिक आहार लेते हैं, तो वह हेल्दी डाइट लेने का अच्छा संकेत माना जाता है। आपको बता दें कि अगर आप दिन भर में आठ बार से ज़्यादा फल और सब्जियों का सेवन करते हैं, तो आप कैंसर और हृदय रोग के खतरे को कम कर सकते हैं। साथ ही यह हेल्दी आहार आपके जीवन में खुशी का स्तर भी बढ़ा सकता है।

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लंदन के यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के प्रोफेसर एंड्र ओसवाल्ड ने बताया कि “फल और सब्जियां खाने से हमारी खुशी में तेज़ी से इजाफा होता है और बाद में यह हमारे स्वास्थ्य को बेहतर करता है”। इस शोध के निष्कर्षों से पता चला है कि फल और सब्जियों की रोजाना आठ खुराक तक हरेक अतिरिक्त खुराक उसी मात्रा में हमारी खुशी को बढ़ाती है। जो लोग फल और सब्जियां बिल्कुल नहीं खाते थे, जब उन्होंने रोजाना आठ बार इन्हें खाना शुरू किया, तो उन्हें अपने जीवन में ज़्यादा संतोष का अनुभव हुआ।

फलों और सब्जियों को खाने से मिलते हैं यह लाभ

ओसवाल्ड का कहना है कि “फलों और सब्जियों का उपभोग बढ़ाने से तत्काल खुशी मिलनी शुरू हो जाती है”। शोधकर्ताओं के अनुसार दो सालों तक लगातार फलों और सब्जियों को अपने आहार में शामिल करने से काफी सकारात्मक और मनोवैज्ञानिक लाभ पाए जा सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड की शोधकर्ता रेडजो मजसिक ने कहा कि “अपने आहार में फलों और सब्जियों का सेवन करने से हमें मनोवैज्ञानिक लाभ मिलता है। हालांकि बीमारियों से बचाव का लाभ तो दशकों बाद मिलता है”।

अमेरिकन जरनल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित इस शोध में कहा गया है कि स्वास्थ्य पेशेवरों को लोगों को फल और सब्जियों को अधिक से अधिक खाने के लिए राजी करना चाहिए, खासतौर से विकासशील देशों में, जहां के नागरिक सामान्य तौर पर अस्वास्थ्यकर आहार ग्रहण करते हैं। इस शोध के दौरान शोधदल ने चुने गए 12,385 लोगों के आहार पर अध्ययन किया।

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अमरनाथ यात्राः फंसे यात्रियों से जानें, कश्मीर हिंसा का आंखों देखा हाल

कश्मीर घाटी में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में हिज्बुल मुजाहिदीन के एक शीर्ष कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद भड़की हिंसा को देखते हुए जम्मू से आज लगातार तीसरे दिन अमरनाथ यात्रा स्थगित कर दी गई। लगभग 20 हजार यात्री फंसे हुए हैं।

जम्मू में एहतियात के तौरपर मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी फिलहाल बंद कर दी गई हैं। कश्मीर हिमालय के पवित्र अमरनाथ गुफा में अबतक 1,18,747 तीर्थयात्रियों ने हिमलिंग के दर्शन किए हैं।राज्य सरकार की एक विज्ञप्ति के अनुसार, यात्रा के आठवें दिन 15,684 यात्रियों ने अमरनाथ धर्मस्थल पर बर्फानी बाबा के दर्शन किए। विज्ञप्ति में कहा गया है, जम्मू से दो आधारशिविरों के लिए यात्रियों का काफिला कानून व्यवस्था के चलते नहीं गया।

यात्रियों का दर्द
श्रीनगर में हिंसा की वजह से अमरनाथ यात्र पर गए बहुत से श्रद्धालुओं को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ा। बहुत से यात्री फंस गए। ऐसे ही कुछ लोगों ने ‘हिन्दुस्तान’ के साथ अपना दर्द साझा किया।

चारों ओर मारकाट पथराव, आगजनी
मुरादाबाद निवासी अजय त्रिवेदी ने बताया: बाबा! आखिर ये क्या हो रहा है। यकीन कीजिए, ऐसे स्याह नजारों की कल्पना भी न की थी। आगजनी, मारकाट और पथराव के नजारों को देख अब तक बदहवास हैं। हे बाबा! सबकी सुरक्षा करो। हम जम्मू पहुंचकर कटरा से आगे बढ़ रहे थे। मन में बाबा की दर्शन की लालसा और जुबां पर बाबा के जयकारे। इतने में ही सेना के जवानों के बूटों की आवाज ने ध्यान तोड़ा। दूर नजर गई तो देखा तो हमें वापस लौटने के इशारे हो रहे थे। हमने देखा कि दूर आगजनी हो रही थी। पथराव हो रहा था। लोग भाग रहे थे। मेरे साथ मेरा 20 साल का बेटा आकाश भी है। हम दोनों ने वहीं से वापसी की। अब वापस जम्मू आ गए हैं। हमारे कई दूसरे साथी पटनीटॉप में फंसे हैं। यहां खाने का सामान मिल भी रहा है तो वो इतना महंगा है कि हर किसी की सामर्थ्य नहीं कि खरीद सके।

भोलेनाथ ही पार लगाएंगे
लखनऊ निवासी हरीश श्रीवास्तव ने बताया: मैं कल से यहां पर फंसा हूं। खाने-पीने का अपना सामान भी अब खत्म हो रहा है। सेना से पूरी मदद मिल रही है। चारों ओर दहशत का ऐसा वातावरण है कि सब डरे हुए हैं। मुझको तो अपने भोलेनाथ का ही सहारा है, वो उनकी यात्र पर आने वाले श्रद्धालुओं की परीक्षा ले रहे हैं और वही पार भी लगाएंगे। रात को सेना ने हमे यहां से सुरक्षित निकालकर दूसरी जगह ले जाने का प्रयास किया पर पथराव जारी रहने के कारण हम यहां से निकल नहीं पा रहे हैं। मेरे साथ 400 अन्य श्रद्धालु भी फंसे हैं। सेना हमें सुरक्षित निकालने के लिए पूरा प्रयास कर रही है। भोजन और पानी की व्यवस्था भी उनकी ओर से ही की जा रही है।

घबराहट से हर पल दिल बैठा जा रहा
आगरा निवासी झम्मन सिंह कुशवाहा ने बताया: ‘तीन दिन से बालटाल और श्रीनगर के बीच मनीग्राम में फंसे हुए हैं। चारों तरफ सुरक्षाबल हैं, फिर भी डर के मारे दिल बैठा जा रहा है। जाने कब अनजान मुसीबत घेर ले। इंटरनेट सेवा भी बंद है। मेरे जैसा ही हाल आगरा से अन्य 35 लोगों का है। आठ जुलाई को बाबा के दर्शन कर लौट रहे थे, लेकिन सीआरपीएफ के जवानों ने बस को बीच में रुकवा लिया। कहते हैं, स्थिति खराब है, सही होने के बाद ही जा सकेंगे। तीन दिन से खाना लंगर में खा रहे हैं। शनिवार को कुछ लोगों ने अचानक से पथराव कर दिया, तमाम तरह के बुरे ख्याल मन में आने लगे। तीन जुलाई को पंजीकरण कराने वाले आगरा के 71 लोग तो लौट चुके हैं, लेकिन हमने छह जुलाई को पंजीकरण कराया था। हम सभी फंसे हुए हैं।’

रातभर गोलियां चलती रहीं
अलीगढ़ निवासी दिनेश वर्मा ने बताया: शनिवार को मां वीना वर्मा के साथ दर्शन कर के श्रीनगर लौट आया हूं। लेकिन यहां से आगे जाना मुश्किल है, इसलिए होटल जहांगीर में रुका हूं। होटल के बाहर कफ्यरू जैसा माहौल है। रात भर गोली चलने की आवाजें आती रहीं। किसी को भी होटल से बाहर निकलने की इजाजत नहीं है। डर के मारे लोग छत और गैलरी तक भी नहीं जा रहे हैं। हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं। पता नहीं कब तक फंसे रहना पड़ेगा।

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7वां वेतन आयोग गतिरोध : दोनों ओर से मिल रहे पॉजिटिव संकेत, बढ़ सकता है न्यूनतम वेतनमान!

नई दिल्ली: सातवें वेतन आयोग (7वां पे कमिशन) की रिपोर्ट को कैबिनेट ने कुछ संशोधनों के साथ स्वीकार कर लिया और न्यूनतम वेतन में खास बढ़ोतरी नहीं होने का हवाला देकर कई कर्मचारी संगठनों ने अपने समर्थकों के साथ 11 जुलाई से हड़ताल पर जाने की घोषणा कर रखी है। करीब 33 लाख कर्मचारियों का समर्थन प्राप्त इन संगठनों ने सरकार को 6 जुलाई तक की अंतिम तारीख दी है जिसमें सरकार अपने निर्णय से इन्हें अवगत करा दे।

सरकार के निर्णय से असंतुष्ट रहने पर कर्मचारी संगठन अपने हड़ताल के फैसले पर आगे बढ़ने का निर्णय ले सकते हैं। फिलहाल बुधवार की स्थिति यह है कि 33 लाख कर्मचारियों की हड़ताल पर जाने की धमकी से दबाव में आई केंद्र सरकार की कर्मचारी नेताओं से बातचीत जारी है। लेकिन आज तक सरकार की ओर से कर्मचारी नेताओं को लिखित आश्वासन नहीं दिया गया।

मौखिक रूप से न्यूनतम वेतनमान बढ़ाने को तैयार सरकार
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार ने मौखिक रूप से कह दिया है कि न्यूनतम वेतनमान बढ़ाने की उनकी मांग को मान लिया गया है। सरकार ने कर्मचारियों की मांग और वेतन बढ़ोतरी में कुछ विसंगतियों को दूर करने के लिए कमेटी बना दी है। यह कमेटी बैठक कर कर्मचारियों की दिक्कतों को दूर करने का प्रयास कर रही है।

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सरकार ने नहीं दिया लिखित आश्वासन
कर्मचारी संगठनों के नेताओं का कहना है कि सरकार से बातचीत जारी है और उन्होंने फिर दोहराया कि सरकार लिखित आश्वासन दे या ऑशियल नोटिफिकेशन जारी करे जो सरकार ने अभी तक नहीं किया है। यानि अभी गतिरोध बरकरार है। सूत्र बता रहे हैं कि दोनों ओर से बर्फ कुछ पिघली है। सरकार जहां न्यूनतम वेतन बढ़ाने की कर्मचारी संगठनों की मांग पर राजी हो गई है वहीं, कर्मचारी संगठन भी कुछ झुकने को तैयार हैं।

न्यूनतम वेतनमान 22-23000 रुपये किया जा सकता है
सूत्र बता रहे हैं कि जहां कर्मचारी संगठन 7वें वेतन आयोग द्वाया तय न्यूनतम वेतन 18000 से बढ़ाकर 26000 करने की मांग कर रहे हैं वहीं, सरकार की ओर से इशारा किया गया है कि इसे 22-23000 रुपये किया जा सकता है। सूत्र बता रहे हैं कि सरकार की ओर से कर्मचारी संगठनों को बता दिया गया है कि कर्मचारियों की न्यूनतम वेतन मांग के अनुसार सरकार पर जो खर्चा आएगा वह काफी ज्यादा होगा, इसलिए कर्मचारी संगठनों को सरकार ने अपनी मजबूरी भी बता दी है। अब कर्मचारी संगठन इस पर विचार कर रहे हैं कि सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार किया जाए या नहीं।

बढ़े वेतनमान को लागू करने पर सरकार पर पड़ेगा बोझ
सरकारी सूत्र बता रहे हैं कि यदि सरकार इस बढ़े वेतनमान को लागू करेगी तो सरकार यह भी अध्ययन कर रही है कि इसका अतिरिक्त बोझ कितना पढ़ेगा। सरकार इस नए वेतनमान का खर्च वहन करने की स्थिति में है या नहीं।

न्यूनतम सैलरी और पेंशन है कर्मचारियों की मांग में
कर्मचारी संगठन मानते हैं कि उनकी सबसे अहम मांग न्यूनतम सैलरी में बढ़ोतरी को लेकर है। लिहाजा इसे लेकर केंद्र के आखिरी फैसले पर सबकी नज़र रहेगी। पहले दौर की बातचीत में कर्मचारी संगठनों ने मुख्य तौर पर दो मांगे सरकार के सामने रखीं हैं। पहली, कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 7000 से बढ़ाकर 26000 सैलरी की जाए। दूसरी, नई पेंशन व्यवस्था को लेकर उनकी चिंताओं को दूर किया जाए।

7वें पे कमिशन में बिना बदलाव के सरकार पर बढ़ा 1,02,100 करोड़ रुपये का सालाना बोझ
सातवें वेतन आयोग द्वारा लगाए गए अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2016-17 में इसकी सभी सिफारिशों पर अमल से अतिरिक्‍त वित्‍तीय बोझ 1,02,100 करोड़ रुपये का पड़ेगा। इसके अलावा वर्ष 2015-16 के दो महीनों के लिए वेतन एवं पेंशन से जुड़ी बकाया राशि के भुगतान हेतु 12,133 करोड़ रुपये का अतिरिक्‍त बोझ वहन करना पड़ेगा।

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मोदी सरकार का बड़ा फैसला, डाकघरों को मिलेगा बैंक का दर्जा

नई दिल्ली: डाकघरों को लेकर मोदी सरकार ने एक अहम फैसला लिया, जिसके तहत सभी डाकघरों को बैंक का दर्जा दिया जाएगा। इसके साथ ही इसमें एटीएम की भी सुविधा दी जाएगी। बताया जा रहा है कि बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में भी इस फैसले को मंजूूरी मिल गई है। कैबिनेट के फैसले के मुताबिक,  ये बैंक मार्च 2017 तक ऑपरेशनल हो जाएंगे। इसके अलावा कैबिनेट ने वर्ष 2016-17 के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 60 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाने का भी फैसला लिया है। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए धान का MSP 1,470 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है।
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ऐन मौके पर बीजेपी ने गोटिया का पर्चा भरवाकर तन्‍खा की राह रोकी

राज्‍य की राजनीति में भाजपा के प्रदेश स्‍तरीय नेताओं के ना चाहने के बाद केन्‍द्र की ओर से मिले निर्देश के बाद भाजपा की ओर से अनिल दवे, एमजे अकबर के नामांकन के साथ ही निर्दलीय के तौर पर विनोद गोटिया का पर्चा दाखिल करवाकर भाजपा ने कांग्रेस उम्‍मीदवार विवेक तन्‍खा की राह रोकने का प्रयास किया है। भाजपा हाईकमान ने मध्यप्रदेश में कांग्रेस के खाते में जाने वाली राज्यसभा की एकमात्र सीट को भी अपने पक्ष में करने के लिए जबलपुर के विनोद गोटिया को पार्टी के तीसरे उम्मीद्वार के रूप में घोषित किया है। राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए भाजपा के विनोद गोटिया निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में  नामांकन दाखिल किया। विधायक संजय पाठक, ममता मीणा, पुष्पेन्द्र पाठक, के के श्रीवास्तव नाना भाऊ महोड़, जगदीश देवड़ा, नगर सिंह चौहान, दिलीप सिंह परिहार, सहित लगभग एक दर्जन विधायक गोटिया के प्रस्तावक बने। इधर कहा जा रहा है कि विवेक तन्खा का मैनेजमेंट बीजेपी पर भारी पड़ा। सरकार के एक बड़े नेता नहीं चाहते थे कि कांग्रेस प्रत्याशी विवेक को परेशानी आये। केंद्रीय बीजेपी यहां चुनाव चाहती थी। वो भी दलित नेता को सामने लाकर। इसीलिए आज सुबह केंद्र के कहने पर 2 बार नन्दकुमार चौहान ने दलित नेता फूलचन्द्र वर्मा से चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहने को कहा। क्‍योंकि बसपा के 4 वोट ऐसे में बीजेपी को मिल सकते थे। एक बड़े नेता फिर दबाव में आये और एन मौके पर विनोद गोटिया का नाम का एलान करवा दिया। जबकि वर्मा फॉर्म भी ले चुके थे। राज्यसभा की रिक्त हुई तीन सीटों में से दो के लिए बीजेपी के अधिकृत प्रत्याशी अनिल माधव दवे और एमजे अकबर ने आज नामांकन पर्चा दाखिल कर दिया। उधर बसपा के सत्यप्रकाश सखवार का कहना है कि उनकी नेता मायावती तय करेंगी की चुनाव में क्या करना है। पूर्व में राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी के दो अधिकृत प्रत्याशी अनिल दवे और एमजे अकबर नामांकन पर्चा दाखिल करने के लिए बीजेपी प्रदेश कार्यालय से रैली के रूप में विधानसभा पहुंचे। रैली में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई विधायक और बीजेपी नेता शामिल थे। सुबह साढ़े ग्यारह बजे नेतागण विधानसभा परिसर स्थित रिटर्निंग ऑफिसर भगवानदेव इसरानी के कक्ष में पहुंचे। यहां दोनों प्रत्याशियों ने नामांकन पर्चा दाखिल किया। मुख्यमंत्री चौहान ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान दवे और अकबर को अच्छा व्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि दोनों ही विभिन्न क्षेत्रों में काम किए हुए हैं। उनके राजनीतिक अनुभव को पार्टी तथा प्रदेश की जनता को लाभ मिलेगा। जब उनसे राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए बीजेपी की ओर से प्रत्याशी उतारे जाने का सवाल किया गया तो उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया।
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सेबी ने दिया तीन कंपनियों की 25 परिसंपत्तियों की जब्ती का आदेश

भाषा बाजार नियामक सेबी ने इन्फिनिटी रीयल्कॉन, वीयर्ड इंडस्ट्रीज और ग्रीनवल्र्ड ऐग्रो इंडस्ट्रीज के खिलाफ बकाया वसूली के लिए उनकी कुल 25 परिसंपत्तियां जब्त किए जाने के आदेश दिए हैं। सेबी ने इन कंपनियों को जनता से गैर कानूनी तरीके से धन जुटाने का दोषी माना है। सेबी ने जिन परिसंपत्तियों को जब्त करने का निर्देश दिया है उनमें जमीन, रिहायशी फ्लैट और वाणिज्यिक अपार्टमेंट शामिल हैं। इनमें इन्फिनिटी रीयल्कॉन की 10, वीयर्ड इंडस्ट्रीज की नौ और ग्रीनवल्र्ड की छह परिसंपत्तियां हैं।
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विराट ने बनाए 8 रिकॉर्ड लेकिन ये कारनामा करने से चूके

बेंगलुरु। आईपीएल-9 के फाइनल में सनराइजर्स हैदराबाद ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 8 रन से हराकर विराट कोहली के सपनों पर ही पानी फेर दिया। हैदराबाद की टीम पूरे टूर्नामेंट में डेविड वॉर्नर की शानदार बैटिंग की बदौलत फाइनल तक पहुंची थी। लेकिन ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के कप्तान विराट कोहली इस आईपीएल में सबसे ज्यादा रन बनाने बल्लेबाज रहे। वे किसी भी सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने के सर डॉन ब्रैडमैन के रिकॉर्ड की बराबरी करने से 1 रन से चूक गए। फिर भी 8 रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। डॉन ब्रैडमेन ने 1930 में एशेज में 974 रन बनाए थे। तब से अब तक हर क्लास के क्रिकेट में 1536 सीरीज हुई।   लेकिन डॉन ब्रैडमेन का रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ पाया। अगर आईपीएल-9 में विराट एक रन और बनाते तो वे इसकी बराबरी कर लेते। 2 रन और बनाते तो सर ब्रैडमैन का रिकॉर्ड तोड़ देते। आपकों बता दं कि विराट कोहली ने इस आईपीएल में 16 मैचों में 973 रन बना थे। इस सीजन विराट ने चार शतक भी लगाए थे।  विराट ने ये रिकॉर्ड किए अपने नाम -विराट ने सबसे ज्यादा 973 रन बनाए। कोहली के बाद दूसरे नंबर पर 779 के साथ वार्नर हैं।   -विराट ने सबसे ज्यादा 4 शतक लगाए। विराट आईपीएल मेंं इससे पहले सेन्चुरी नहीं लगा पाए थे। 16 मैच में 7 हाफ सेन्चुरी लगाई और एक बार जीरो पर आउट हुए थे। -विराट ने 16 मैचों में 81 के एवरेज से रन बनाए। -विराट ने बतौर कप्तान 38 छक्के मारे। गिलक्रिस्ट के 2009 में 29 छक्के। -विराट आईपीएल में अब तक 139 मैच में 4 सेन्चुरी और 26 फिफ्टी के बूते 4110 रन बना चुके है। -कोहली-डीविलियर्स ने गुजरात के खिलाफ 229 की पार्टनरशिप की, जो रिकॉर्डतोड साझेदारी है। -विराट ने 165 रन बनाए थे आईपीएल-1 में। इस बार 973 रन। इसके साथ ही 590 प्रतिशत का इजाफा हुआ। -विराट ने इस साल टी-20 में 18 बार 50 से ज्यादा रन बनाए हैं।
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